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मासिक काव्य संगोष्ठी में गूंजे साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकार के स्वर

इस खबर के स्पोंसर है सॉफ्टनिक इंडिया, शाही मार्केट, गोलघर, गोरखपुर


गाजीपुर। शारदा ज्योति संस्थान के तत्वावधान में रविवार देर शाम मासिक काव्य संगोष्ठी का आयोजन कवयित्री शालिनी श्रीवास्तव के आवास पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री रिम्पू सिंह द्वारा मां सरस्वती की वंदना से हुआ।

संगोष्ठी में विभिन्न कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, पारिवारिक, पर्यावरणीय तथा मानवीय मूल्यों को स्वर दिया। महाकवि कामेश्वर द्विवेदी ने माता-पिता के महत्व पर आधारित अपनी छंदबद्ध कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। कवयित्री पूजा राय ने पिता की स्मृतियों पर आधारित मार्मिक कविता सुनाकर उपस्थित जनों को भाव-विभोर कर दिया।

युवा कवि मनोज यादव ‘बेफिक्र’ ने अपनी शायरी के माध्यम से रिश्तों की वास्तविकता और जीवन के यथार्थ को प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि डॉ. माधव कृष्ण ने प्रेम, विरह और स्मृतियों पर आधारित कविता पाठ कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।

ओज कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने अपनी प्रभावशाली रचना से समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत पाण्डेय ने अपनी कविताओं के माध्यम से मानवता, इतिहास तथा वर्तमान समय में धन के बढ़ते प्रभाव पर विचार व्यक्त किए।

कवयित्री शालिनी सिंह ने पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को अपनी कविता का विषय बनाया, जबकि कवयित्री रिम्पू सिंह ने ग़ज़ल पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि कवि अपनी संवेदनाओं, दुःख-दर्द और मनोभावों को शब्दों में ढालकर स्वयं को तनावमुक्त करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर दिनेश्वर दयाल श्रीवास्तव, रतन जी, आद्या राय, बिपिन बिहारी वर्मा, सिद्धार्थ शरण सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रिम्पू सिंह ने, अध्यक्षता डॉ. श्रीकांत पाण्डेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सुधीर जी ने किया।

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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)

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